36 लाख आहुतियों के साथ दिल्ली-NCR में तीन दिवसीय महाअनुष्ठान
सनातन साधना परंपरा में माँ बगलामुखी को दशमहाविद्याओं में विशिष्ट स्थान प्राप्त है। माँ की उपासना विशेष रूप से स्तंभन-शक्ति, वाणी-संयम, आत्मबल और विपरीत परिस्थितियों पर विजय की कामना से की जाती है। इसी साधना परंपरा को जनकल्याण के संकल्प के साथ आगे बढ़ाते हुए माँ बगलामुखी साधक आचार्य सूर्यांश के सान्निध्य में इस वर्ष दिल्ली-NCR में छठवाँ अखंड माँ बगलामुखी अघोर महायज्ञ आयोजित किया जा रहा है।
यह तीन दिवसीय महायज्ञ 24 अक्टूबर से 26 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस बार 11 हवन कुंडों पर 101 आचार्यों द्वारा माँ बगलामुखी के मंत्रों के साथ 36 लाख आहुतियाँ समर्पित करने का संकल्प लिया गया है।
2021 में 5 लाख आहुतियों से प्रारंभ हुई महायज्ञ की यात्रा
इस महाअनुष्ठान की शुरुआत वर्ष 2021 में 5 लाख आहुतियों के संकल्प के साथ हुई थी। इसके बाद यह क्रम निरंतर विशाल होता गया। अगले आयोजन में 11 लाख, फिर 21 लाख, उसके बाद 31 लाख और पिछले वर्ष 36 लाख आहुतियों का महापुरश्चरण संपन्न किया गया।
अब वर्ष 2026 में पुनः 36 लाख आहुतियों के महापुरश्चरण का संकल्प लिया गया है। माँ बगलामुखी के मूल मंत्र के 36 अक्षरों को आधार मानते हुए 36 लाख आहुतियाँ समर्पित की जाएंगी।
101 आचार्य, 11 हवन कुंड और विशेष पूजन
महायज्ञ केवल हवन तक सीमित नहीं रहेगा। तीनों दिनों में माँ बगलामुखी की प्रसन्नता के लिए अनेक विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। इनमें केसरयुक्त दूध से माँ का अभिषेक, हल्दी से विशेष अभिषेक, चंपा के पुष्पों से सहस्रार्चन तथा कमल पुष्पों से सहस्रार्चन प्रमुख रहेंगे।
इसके साथ ही भगवान शिव का रुद्राभिषेक निरंतर किया जाएगा। शक्ति उपासना में शिव और शक्ति की अभिन्नता को ध्यान में रखते हुए भगवान शिव की आराधना को भी इस महाअनुष्ठान का महत्वपूर्ण अंग बनाया गया है।
प्रतिदिन महाआरती और रात्रि में दीपदान
24 अक्टूबर को महायज्ञ का शुभारंभ प्रातः 7 बजे होगा। प्रथम सत्र प्रातः 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक तथा द्वितीय सत्र शाम 4 बजे से रात्रि 8 बजे तक चलेगा। इसके पश्चात रात्रि 8 बजे माँ बगलामुखी की महाआरती होगी।
रात्रि के समय माँ की प्रसन्नता और अपनी मनोकामनाओं के संकल्प के साथ विशेष दीपदान भी किया जाएगा। 25 अक्टूबर को भी इसी प्रकार यज्ञ, पूजन, अभिषेक, आरती और दीपदान का क्रम जारी रहेगा।
26 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे पूर्णाहुति के साथ तीन दिवसीय महायज्ञ का समापन होगा। महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन भंडारे की व्यवस्था रहेगी और पूर्णाहुति के दिन भी विशाल भंडारा आयोजित किया जाएगा।
विशेष हवन सामग्री से दी जाएंगी आहुतियाँ
माँ बगलामुखी की उपासना में पीले रंग और विशिष्ट द्रव्यों का विशेष महत्व माना गया है। इस महायज्ञ के लिए तैयार की जाने वाली हवन सामग्री में हल्दी, पीली सरसों, हरताल, गुग्गुल, केसर के पुष्प और सेंधा नमक सहित अन्य निर्धारित पूजन सामग्री का प्रयोग किया जाएगा।
महायज्ञ में यजमान एवं साधक पीले वस्त्र अथवा पीली धोती धारण करके यज्ञ में बैठेंगे।
माँ बगलामुखी मूल मंत्र का होगा महापुरश्चरण
इस महायज्ञ का केंद्र माँ बगलामुखी का मूल मंत्र रहेगा। मंत्र का शुद्ध पाठ गुरु-परंपरा एवं दीक्षा के अनुसार करना उचित माना जाता है, इसलिए महायज्ञ में इसका जप और हवन प्रशिक्षित आचार्यों के निर्देशन में किया जाएगा।
इसी मंत्र के 36 अक्षरों को आधार मानकर 36 लाख आहुतियों का विशाल महापुरश्चरण संपन्न करने का संकल्प है। एक साथ 101 आचार्यों द्वारा 11 हवन कुंडों पर होने वाला यह अनुष्ठान अपने स्वरूप और संकल्प की दृष्टि से अत्यंत विशाल होगा।
25 वर्षों की साधना के बाद आचार्य सूर्यांश का संकल्प
इस महायज्ञ का आयोजन माँ बगलामुखी साधक आचार्य सूर्यांश के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। आचार्य सूर्यांश के अनुसार वे लगभग 25 वर्षों से माँ बगलामुखी मंत्र की साधना एवं जप कर रहे हैं और गुरु-परंपरा से माँ बगलामुखी की दीक्षा प्राप्त कर चुके हैं।
उनका उद्देश्य इस महापुरश्चरण को केवल व्यक्तिगत साधना तक सीमित न रखकर अधिक से अधिक लोगों को माँ बगलामुखी की उपासना और यज्ञ से जोड़ना है। उनका मानना है कि इतना विशाल अनुष्ठान केवल मानवीय प्रयास से नहीं, बल्कि गुरु कृपा और माँ बगलामुखी के आशीर्वाद से ही संभव होता है।
किन कामनाओं को लेकर महायज्ञ में सम्मिलित हो सकते हैं?
श्रद्धालु अपनी व्यक्तिगत मनोकामना और संकल्प लेकर महायज्ञ में भाग ले सकते हैं। माँ बगलामुखी की परंपरागत उपासना में न्यायालय संबंधी विवादों में अनुकूलता की प्रार्थना, व्यापार की बाधाओं को दूर करने, विरोध और शत्रु-बाधा से रक्षा, नकारात्मक प्रभावों से शांति, ग्रह-पीड़ा के निवारण तथा यश, मान-सम्मान और कार्यसिद्धि की कामना से साधना की जाती है।
इन लाभों को धार्मिक आस्था और साधना-परंपरा के संदर्भ में समझना उचित है; किसी विशेष सांसारिक परिणाम की गारंटी के रूप में नहीं।
हर श्रद्धालु के लिए खुला है महायज्ञ
इस महायज्ञ की विशेषता यह है कि श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और मनोकामना के साथ माँ बगलामुखी के चरणों में संकल्प लेकर सम्मिलित हो सकते हैं। कोई न्याय की प्रार्थना लेकर आए, कोई व्यापार की बाधा दूर होने की कामना से, कोई पारिवारिक शांति के लिए या कोई केवल माँ के दर्शन और आशीर्वाद के लिए—महायज्ञ का मूल भाव लोककल्याण और माँ बगलामुखी की आराधना है।
24 से 26 अक्टूबर 2026 तक होने वाला यह छठवाँ अखंड माँ बगलामुखी अघोर महायज्ञ साधना, मंत्र-जप, हवन, अभिषेक, सहस्रार्चन, रुद्राभिषेक, दीपदान और महाआरती का तीन दिवसीय आध्यात्मिक संगम होगा।